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छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों के लिए बड़ा फैसला, पीजी अध्ययन अवकाश 2 से बढ़ाकर 3 वर्ष किया गया

Shantanu Roy
6 April 2026 8:09 PM IST
छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों के लिए बड़ा फैसला, पीजी अध्ययन अवकाश 2 से बढ़ाकर 3 वर्ष किया गया
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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सेवारत चिकित्सकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पीजी पाठ्यक्रम हेतु अध्ययन अवकाश की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी है। इस फैसले को प्रदेश के डॉक्टरों के लिए बड़ी राहत और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस निर्णय से राज्य के सैकड़ों चिकित्सकों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। राज्य सरकार के इस निर्णय का Chhattisgarh Doctor Federation ने स्वागत किया है। फेडरेशन का कहना है कि यह निर्णय लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों, संवाद और चिकित्सकों के हित में चलाए गए अभियान का परिणाम है। संगठन लगातार यह मांग उठा रहा था कि पीजी कर रहे डॉक्टरों को पर्याप्त अध्ययन अवकाश मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण को पूरी तरह पूरा कर सकें।
फेडरेशन के अध्यक्ष Dr. Heera Singh Lodhi ने इस निर्णय पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सामूहिक प्रयासों की सफलता है। उन्होंने कहा कि संगठन ने इस मुद्दे को लगातार शासन के समक्ष रखा और अंततः सकारात्मक निर्णय सामने आया। उनके अनुसार, इससे न केवल डॉक्टरों को लाभ मिलेगा बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। हालांकि, इस फैसले के साथ एक महत्वपूर्ण मुद्दा अभी भी सामने है। वर्ष 2025 से पहले पीजी पाठ्यक्रम के लिए अध्ययन अवकाश पर गए चिकित्सकों को इस नई व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे डॉक्टर वर्तमान में कई प्रशासनिक समस्याओं और असमानताओं का सामना कर रहे हैं। डॉ. हीरा सिंह लोधी ने कहा कि वर्ष 2021, 2022 और 2023 बैच के वे चिकित्सक, जो पहले से अध्ययन अवकाश पर हैं, उन्हें भी इस संशोधित नीति का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि उस समय इन डॉक्टरों को आश्वासन दिया गया था कि उनके साथ न्याय किया जाएगा, लेकिन अभी तक उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
इस संबंध में फेडरेशन ने मांग की है कि पूर्व में अध्ययन अवकाश पर गए डॉक्टरों को भी बढ़े हुए अवकाश के अनुरूप क्षतिपूर्ति और लाभ दिया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की असमानता समाप्त हो सके। फेडरेशन के जुड़े अध्यक्ष Dr. Resham Singh ने राज्य शासन से आग्रह किया है कि इस विषय पर जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं और प्रभावित चिकित्सकों को राहत दी जाए। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि सभी डॉक्टरों को समान अवसर और सुविधाएं मिलें। कि इस निर्णय से राज्य में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और
डॉक्टरों
को बेहतर प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। इससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है। फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह आगे भी डॉक्टरों के अधिकारों की रक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रयास जारी रखेगा। संगठन का कहना है कि यह निर्णय एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन अभी भी कई मुद्दों पर काम किया जाना बाकी है। राज्य सरकार के इस कदम को स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे डॉक्टरों को न केवल पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, बल्कि वे बेहतर तरीके से प्रशिक्षण लेकर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं दे सकेंगे।
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